Saturday, November 19, 2011

"बावरा मन..."


 कितना खुबसूरत सफ़र है...
जहा न कुछ चाह है पाने की,
न राह है कही खो जाने की,
जहा मन अपने आप में मशगुल है,
परवाह नहीं उसे किसी की,
न किसी के आने की...
कि आकर थाम ले,
न किसी के जाने की...
कि जाकर कही खो जाये,
अजीब सा सुकून है,
यह सोचकर कि
दर्ज है उसका नाम भी दुनिया की इस भीड़ में,
हर लफ्ज महफूज है उन पन्नों पर
जहा उसकी तक़दीर लिखी है, 
कुछ जानने की उसको लालसा नहीं,
कुछ पाने की उसको आस नहीं,
अपनी ही दुनिया में खोया मन...
जहा न दिन के सवेरे का आभास,
न ही रात के अँधेरे का अहसास....
बस, हौले से उसके लबों पर मुस्कान तैर जाती है,
जब भी खिड़की से चाँद की ओर ताकता है,
समुंद्र की फैली चादर पर चलता है,
या संगीत की स्वर लहरिया सुनता है,
.....कुछ ऐसा ही है उसका बावरा मन...
छुपाने से छुपता नहीं...
दिखाने से दिखता नहीं...


Wednesday, June 29, 2011

"उड़ती हुई मैना "



एक उड़ती हुई मैना है वो...
जिसके असीम सपने है...इच्छाए है...
जो उड़ जाना चाहती है ,
इस अनंत खुले आकाश में पंख फैलाये ,
पर कुछ बंधन है , बेड़िया है ,
जो उसे ऐसा करने से रोकती है...
वो चाहकर भी अपने पंख नहीं खोल पाती...
उस पिंज़रे में रहकर अपने पंख फडफड़ाती है...
छटपटाती है , तड़पती है इस इंतजार में कि
एक दिन कोई अनजाना मुसाफिर आएगा ,
और उसे छुड़ा ले जायेगा ,
जहा उसे उड़ने के लिए अनंत आकाश मिलेगा...
जहा उसकी इच्छाए , उसके अंतहीन सपने साकार रूप लेने लगेंगे...उसके मन मुताबिक...







"खुबसूरत अहसास "



" ज़िन्दगी के हर ख्वाब को सजाती हुई चलू ,
बिखरे हुए हर मोती को चुनती हुई चलू , 
सोचा न था तुम मिल जाओगे राहों में यू ही ,
ज़िन्दगी के हर पल को मोहब्बत के अहसास से भरती हुई चलू ..."



Friday, April 22, 2011

ज़िन्दगी के अनेको रंग

ज़िन्दगी न जाने कितने रंग दिखाती है,
कभी खिलखिलाती है,
तो कभी मुस्कुराती है,
कभी हसाती है,
तो कभी रुलाती है,
कभी गुनगुनाती है,
तो कभी  सुरों के तारो को झनझना जाती है,
विचारों में न जाने कितने खवाब संजो जाती है...



Tuesday, March 08, 2011

International Women's Day- 8 march 2011





सृजन है नए विचारो का...

सृजन है मानसिक संकल्प का...
सृजन है नए युग का...एक स्त्री के माद्ययम से...क्योकि
सृजन का मजबूत आधार है स्त्री...
स्वयं में विनाश का श्रृंगार है स्त्री...
हर इंसान में छुपी असीम शक्ति है स्त्री...
आस्था है स्त्री...
अटूट विश्वास है स्त्री...
व्यक्ति की हर आस है स्त्री...
ज़िन्दगी के इतने लम्बे सफ़र को तय कर चुकने के बाद जब भी पीछे मुड़कर देखा जाता है तो यही सोचते है...कितनी लम्बी ज़िन्दगी जी ली गई...इसमें क्या खोया और क्या पाया...देखा जाये तो खोने के लिए वास्तव में हमारे पास कुछ नहीं होता और पाने के लिए पूरी काएनात हमारे सामने होती है...जिसे अपने मन चाहे रंगों से भर दिया जाता है...
स्त्री शक्ति है उस विराट मन की...
जहा जो सोचो वो हो जाये,
जो चाहो वो सामने प्रकट हो जाये,
जो करो वो असीम शांति दे जाये...
पूरी काएनात आपके साथ मिलकर गीत गाए, जीवन मधुर और मन संगीत बन जाये...






Thursday, February 10, 2011

आपके इंतजार में....


मोहब्बत के रंग में रंगने की इच्छा लिए बैठी हू मै,
निश्छल और सच्चे प्यार की तीर्व कामना लिए बैठी हू मै,
इंतजार के पलों को शिद्दत से जीती हू मै,
मन की तीर्व वेदना को हँसी में उड़ा देने की नाकाम कोशिश करती हू मै,
आँखों से बहते हर आंसू को रोकने का उपक्रम करती हू मै,
तुम्हारे आने वाले दिन को पूजनीय बनाने की कामना लिए बैठी हू मै,
तुम्हारे आने के बाद खुद से एक पल भी अलग न करने का संकल्प लिए बैठी हू मै,
तुम्हे हर ख़ुशी देने का वादा स्वयं से किये बैठी हू मै,
तुम्हारी उम्मीदों पर खरी उतरने का संकल्प लिए बैठी हू मै,
तुम्हारे सपनों को मूर्त रूप देने का वचन लिए बैठी हू मै,
बस अब आ भी जाओ, और इंतजार नहीं होता मुझसे.......